Wednesday, May 7, 2014

जात ना पूछो नेता की

दौर वो भी था जब जात पात तो थी .......
लेकिन नेता जात नहीं बताते थे
जरुरत ही ना थी .....
अपना राष्ट्रीय चरित्र बनाने में जात की क्या जरूरत ........
गांधी की क्या जात ?
लोहिया की ........
आचार्य नरेंद्र  देव की क्या जात है ........
राजेंद्र बाबू , कृपलानी, सुभाष बाबू और ना जाने कितने तमाम नेता जिनको अपनी जात बताने की जरूरत ही नहीं थी.
दौर आज है की किसी ने तोहमत लगा दी की नीच राजनीति हो रही है तो राष्ट्रीय चरित्र की पार्टी के तथा कथित राष्ट्रीय नेता अपनी नीची जाती का परिचय देने लगे .
अरे साब जातिया कोई नीची नहीं होती है
नेता बंधू लोगो ने कोई मौका नहीं छोड़ा है
अब लोहिया के नाम पे समाजवादी व्यापारी सभा कार्यक्रम करती है
तो लोगो पता चलता है की लोहिया बनिया थे...
वणिक समाज के कार्यक्रम में गांधी भी बनिया हो गए...........
जब कायस्थ महासभा अपने सालाना कार्यक्रम में राजेंद्र बाबू की फोटो लगाती है तो लोगो को ध्यान आता है की बाबू जी कायस्थ है..
लेकिन आज तो होड़ सी लगी है नेताओ में अपनी जात बताने में .........
ये सिद्ध करता है की नेता की स्वीकारोक्ति इतनी सिमित हो गयी है की जात बताये बिना काम नहीं चलेगा ....
ना ही कोई सैद्धांतिक सोच है ना ही सिद्धांत के आधार पे संघठन ....
भैया जात बिना काम नहीं चलेगा
अरे दद्दा जब इतनी लहर है तो का जरूरत है अपनी जात बताने की
खैर १६ मई का इन्तजार है .......
की जात काम आता है की  नाम काम आता है या फिर संघर्ष काम आता है

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