Wednesday, April 30, 2014

गहमर में प्राइम टाइम

चुनावी चक्कलस में गहमर और लमही कुछ ओहींगा लागल
 जैसे मई जून की दुपहरिया में आम के बगिया की छाव.
दुबे जी तो कमाल के व्यक्तित्व है.
 आजुओ  कुछ लोग बा जे बिना किसी मेवा के सेवा में लागल  बा.
वार्ना गाव देहात में भी अब शहरी संस्कृति आ चुकल ह.
कुछ मिली तबे करब नाही त हमरा के कौन अकाज बा.
रवीश बाबू पूर्वांचल में ई गर्मी में माइक लेके गाव देहात में खाक छानत बाटे.
नीक लागल.
गहमर में अगर ६० सेकेंड  अगर भोला नाथ गहमरी भी कवर होते त और मज़ेदार होत.
बाकी 50  मिनट में का का दिखावे.
अच्छा है. 

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